बैंक अधिकारी राजीनामे के जरिए करें अधिक से अधिक प्रकरणों का निस्तारण :बंसल

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13 मई को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर हुई बैठक में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव प्रमोद बंसल ने बैंक अधिकारियों से किया विचार- विमर्श

चूरू। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अध्यक्ष तथा जिला एवं सेशन न्यायाधीश रविन्द्र कुमार के निर्देशानुसार बुधवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव प्रमोद बंसल ने आगामी 13 मई, 2023 को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत के संबंध में बैंक अधिकारियों के साथ मीटिंग का आयोजन किया। बैठक मेंं एलडीएम अमरसिंह, एसबीआई से मनीष गुप्ता, राजीव, पीएनबी से मनोहर लाल मीणा व बीआरकेजीबी से सुनील कुमार उपस्थित रहे।

इस मौके पर सचिव प्रमोद बसंल ने कहा कि लोक अदालत को सफल बनाने हेतु बैंक अधिक से अधिक प्रि-लिटिगेशन प्रकरणों को प्रस्तुत करें। इन प्रकरणों को अधिक से अधिक संख्या में राजीनामा के जरिये निस्तारित करने का प्रयास करें ताकि प्री-लिटिगेशन के माध्यम से धन की वसूली हो सके तथा लंबित प्रकरणों का निस्तारण हो सके। इसी प्रकार बैंकों के न्यायालयों में लंबित 138 एन.आई. एक्ट के प्रकरणों में भी राजीनामा के जरिये प्रकरणों के निस्तारण के प्रयास किये जाएं ताकि लोक अदालत में जरिये राजीनामा अधिक से अधिक प्रकरणों का निस्तारण किया जाकर लोक अदालत को सफल बनाया जा सके। उन्होंने बताया कि उपस्थित सभी को प्रकरणों को दर्ज करने से लेकर निस्तारण तक की सम्पूर्ण प्रक्रिया से अवगत करवाया गया। लोक अदालत के संबंध में अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार हेतु स्थानीय समाचार-पत्रों, पैम्फलेट के माध्यम से प्रचार-प्रसार करते हुए सभी राजकीय कार्यालयों, राजकीय उपक्रमों, बैंको एवं प्रमुख सार्वजनिक स्थानों बैनर/पोस्टर इत्यादि चस्पा करवाए जाएंगे तथा नगर पालिका के कचरा संग्रहण वाहनों में भी ऑडियो रिकॉर्डिंग (जिंगल एवं नाल्सा सॉन्ग) के प्रसारण के माध्यम से व प्रमुख सार्वजनिक जगहों पर पैम्पलेट का वितरण किया जाएगा ताकि अधिक से अधिक पक्षकार लोक अदालत के माध्यम से अपने प्रकरणों का निस्तारण करवा सके। उन्होंने बताया कि लोक अदालत के सफल आयोजन हेतु संबंधित विभागों के अधिकारीगण के साथ बैठकों का आयोजन किया जाकर प्रकरणों के चिन्हीकरण, राजस्व, बैंक, बीमा इत्यादि प्रकरणों के संबंध में विचार-विमर्श, धारा 138 एन.आई. एक्ट के 10 लाख रुपए तक के एवं ऋण वसूली से संबंधित लम्बित/प्री-लिटिगेशन श्रेणी के प्रकरणों का राजीनामा के माध्यम से अधिकाधिक निस्तारण सुनिश्चित किए जाने बाबत जरूरी उपायों पर विचार-विमर्श, प्रकरणों के अधिकाधिक निस्तारण के संबंध में प्री-काउंसलिंग के सफल आयोजन के क्रम में विचार-विमर्श, राजस्थान लिटिगेशन पॉलिसी, 2018 के तहत प्रकरणों के निराकरण के प्रयास एवं राष्ट्रीय लोक अदालत में प्रकरणों के निस्तारण में आने वाली कठिनाइयों के संबंध में विचार-विमर्श किए जाने को शामिल किया गया है।

स्चिव बंसल ने बताया कि इस राष्ट्रीय लोक अदालत में प्री-लिटिगेशन प्रकरण, दाण्डिक शमनीय प्रकरण, धारा 138 परक्राम्य विलेख अधिनियम के प्रकरण, धन वसूली, प्रकरण, एम.ए.सी.टी. प्रकरण, श्रम एवं नियोजन संबंधी विवादों के प्रकरण, बिजली, पानी एवं अन्य बिल भुगतान से संबंधित प्रकरण, वैवाहिक विवाद (तलाक को छोड़कर), भूमि अधिग्रहरण के मुआवजे से संबंधित प्रकरण, मजदूरी भत्ते और पेंशन भत्तों से संबंधित सेवा मामले, राजस्व मामले एवं अन्य सिविल मामले (किराया, सुखाधिकार, निषेधाज्ञा दावे एवं विनिर्दिष्ट पालना दावे) आदि एवं अन्य श्रेणियों से संबंधित प्रकरणों को रखा जाकर जरिये राजीनामा इन प्रकरणों को अधिक से अधिक संख्या में निस्तारित करवाये जाने के प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि लोक अदालत में मामले का निस्तारण होने पर पक्षकार के समय व धन दोनों की बचत होती है तथा आपसी भाईचारे की भावना का विकास होता है। लोक अदालत में प्रकरण के निस्तारण से किसी भी पक्षकार की हार नहीं होती है बल्कि दोनों पक्षकारों की जीत होती है।

 

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