चूरू। राजकीय लोहिया महाविद्यालय में संस्कृत विभाग की ओर से विष्व संस्कृत दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्य प्रो. महावीर सिंह व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. मंजू शर्मा ने दीप प्रज्जवलित कर किया। इस अवसर पर प्रो. मूलचन्द, मधु शर्मा, प्रो. हेमंत मंगल, प्रो. उम्मेद सिंह व प्रो. मोहम्मद जावेद ने मंचस्थ अतिथियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया। शैलजा शर्मा ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। श्रीकृष्ण शर्मा ने सभी अतिथियों का विभाग की ओर से स्वागत किया गया।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुये प्रो. महावीर सिंह ने कहा कि संस्कृत केवल पूजा-पाठ तक ही सीमित रहने वाली भाषा नहीं है, अपितु यह सीखने की भाषा है। इससे व्यक्ति के आध्यात्मिक, बौद्धिक, रचनात्मक ज्ञान का विकास होता है। उन्होंने कहा कि संस्कृत की पूरे विष्व में बहुत अधिक मांग है, इसलिये संस्कृत के विद्यार्थियों को इसमें रुचि लेनी चाहिये।
इस अवसर पर संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. मूलचन्द ने कहा कि संस्कृत हमारे भारत देश की ही नहीं बल्कि यह विष्व की आत्मा है। संस्कृत भाषा को बिना सीखे, समझे विष्व अपना कल्याण नहीं कर सकता। संस्कृत का दायरा सीमित नहीं है। संस्कृत हमेशा सम्पूर्ण पृथ्वी की बात करती है। संपूर्ण संसार को परिवार मानती है। संपूर्ण पृथ्वी हमारा परिवार है। संस्कृत परिमार्जित है, शुद्ध है, परिष्कृत है, इसमें किसी प्रकार का कोई दोष नहीं है अतः हमें संस्कृत सीखनी चाहिये। राजस्थान में भी गनोड़ा गांव को सरकार के द्वारा संस्कृत ग्राम बनाने की योजना चालू कर रखी है, जो कि निकट भविष्य में एक संस्कृत ग्राम के रूप में उभर कर सामने आयेगा।
इस अवसर पर गार्गी हारित ने राजस्थानी डांस की प्रस्तुति दी। पूजा कंवर, रेखा शर्मा, मनीषा कोका ने नृत्य प्रस्तुत किया। मधु शर्मा, कीर्ति, अंजली, रामरतन शर्मा आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किये। इस अवसर पर डॉ. मंजू शर्मा ने कहा कि आज संस्कृत दिवस के अवसर पर सभी विद्यार्थी यह संकल्प लेकर जायें कि हमेशा जीवन को चरितार्थ करने वाले श्लोकों को याद करेंगे। संस्कृत वैज्ञानिक तार्किक भाषा है। संस्कृत के सुभाषितों का अध्ययन करें और हमेशा संस्कृत मय होकर ही जीवन यापन करें। अंजली ने आगंतुको का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन भूमिका लाटा ने किया।