आरक्षण सीमा बढ़ाने प्रति गंभीरता होती तो राज्य पिछड़ा आयोग का गठन कर पिछड़ा वर्ग को सुन सर्वेक्षण करवाती सरकार
प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोले नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़
चूरू। जिला मुख्यालय पर गुरुवार को प्रेस वार्ता में राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने कहा कि सरकारी धन को अपने प्रचार के कार्य में लगा कर मुख्यमंत्री अपना प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि साढे चार साल सरकार सोती रही अब चिरनिंद्रा से सरकार जागी है और मुख्यमंत्री घोषणा पर घोषणा किए जा रहे हैं। जबकि उन्हें यह भी नहीं पता है कि इतना बजट भी नहीं है कि इन्हे पूरा किया जा सके।
महिलाओं से की वादा-खिलाफी
स्मार्ट मोबाइल फोन योजना पर राठौड़ ने कहा कि 2022 में यह घोषणा की गई कि सभी चिरंजीवी बीमा धारकों को मोबाइल फोन दिए जायेंगे जिसमें 1 करोड़ 33 लाख लाभार्थियों को मोबाइल फोन देने की बात की गई थी। लेकिन अब केवल 40 लाख महिलाओं को ही मोबाइल फोन देने की घोषणा की है। राठौड़ ने आरोप लगाया कि जो मोबाइल फोन कैम्पं में बांटे जा रहे हैं वह भी आउट डेटैड हैं।
ओबीसी आरक्षण के पक्ष में है भाजपा लेकिन बिना आयोग की सिफारिश के कैसे लागू हो सकता है आरक्षण
प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि भाजपा ओबीसी आरक्षण के पक्ष में है लेकिन राज्य की कांग्रेस सरकार चुनाव की आचार संहित से दो माह पहले मुख्यमंत्री की ओर से प्रदेश के पिछड़ा वर्ग के आरक्षण की सीमा 21 से 27 प्रतिशत किए जाने की घोषणा कपोल कल्पित है। क्योंकि पिछड़ा वर्ग के आरक्षण की सीमा को तभी बढ़ाया जा सकता है जब राज्य पिछड़ा आयोग सम्पूर्ण अध्ययन के बाद आरक्षण की सीमा बढ़ाने के लिए राज्य सरकार को सिफारिश करता है।
राठौड़ का कहना था कि दुर्भाग्य यह है कि फरवरी 2022 से राज्य पिछड़ा आयोग में मात्र एक अध्यक्ष जस्टिस भंवरू खां ही कार्यरत है; जबकि पिछड़े वर्ग आयोग का सरकार की ओर से विधिपूर्वक गठन राजस्थान उच्च न्यायालय के समता आंदोलन बनाम राज्य सरकार के प्रकरण में दिए गए निर्देशों के बावजूद भी नहीं किया गया। जिसके कारण गत बीस माह में राज्य पिछड़ा आयोग की ना तो कोई बैठक हुई और ना ही पिछड़ा वर्ग आरक्षण की सीमा को 21 से 27 प्रतिशत बढ़ाने के लिए आयोग की ओर से कोई सिफारिश राज्य सरकार को प्रेषित हो पाई। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में पिछड़ा वर्ग के आरक्षण की सीमा को बढ़ाने के प्रति गंभीर होती तो वह अपने कार्यकाल के अंतिम दो माह में आरक्षण की सीमा को बढ़ाने की थोथी घोषणा करने की बजाय विधिवत रूप से राज्य पिछ़ड़ा आयोग का गठन कर राज्य के पिछड़े वर्ग का सर्वेक्षण कराकर पिछड़ा वर्ग को विधिवत सुनती और संवैधानिक कार्रवाई करती। क्योंकि मात्र प्रशासनिक आदेश किसी भी वर्ग के आरक्षण की सीमा को बढ़ाने की इजाजत नहीं दिया जाया करते हैं।
प्रेस वार्ता के वासुदेव चावला, हरलाल सहारण, बसंत शर्मा, भास्कर शर्मा, विजय शर्मा, दीनदयाल सैनी, मोहन गढवाल, पदम सिंह आदि कार्यकर्ता उपस्थित थे।