सोशल मीडिया से ग्रामीणों को जागरुक कर लगा रहे टीका

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घांघू। बीरबल नोखवाल

जहां एक तरफ 18 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के लिए वैक्सीन के कम डोज परेशानी का कारण बन रहे हैं, वहीं 45 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को टीकाकरण केंद्र तक लाने के लिए भरपूर प्रचार-प्रसार करना पड़ा रहा है। गांव घांघू के युवाओं, चिकित्साकर्मियों द्वारा व्यक्तिगत तौर पर कॉल करके, सोशल मीडिया के जरिए जागरुक कर लोगों का टीकाकरण किया जा रहा है। इसी क्रम में सोमवार को घांघू के राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में 45 वर्ष और अधिक आयु के लोगों को कोरोना महामारी से बचाव के लिए कोरोनारोधी टीके लगाये गये । इस दौरान घांघू सहित आसपास के गांवों के लोगों ने टीकाकरण करवाया। घांघू सीएचसी के प्रभारी डॉ. अहसान गौरी ने बताया कि सीएचसी को कोरोनारोधी वैक्सीन की 200 डॉज मिली, जिसमें 150 लोगों का कोरोनारोधी वेक्सीनेशन किया गया। उन्होंने बताया कि घांघू सहित घांघू सीएचसी सेक्टर के अन्तर्गत आने वाले सभी गांवों के लोगों को कोरोना से बचाव के लिए कोरोनारोधी टीकाकरण के लिए जागरुक किया जा रहा है। इसके लिए सोशल मीडिया और गांव के जागरुक लोगों की मदद ली जा रही है। उन्होंने टीका लगवाने वाले लोगों से कहा कि वे अन्य लोगों को भी टीकाकरण के लिए प्रेरित और जागरुक करें । गांव के सामाजिक कार्यकर्ता केशरदेव गुरी ने टीका लगवाने के बाद बताया कि कोरोना महामारी से बचाव के लिए टीका लगवाना बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि मैंने भी टीकाकरण करवाया है। यह बिल्कुल सुरक्षित है। आप सभी लोगों को अपने लिए सेशन निर्धारित होने पर टीकाकरण करवाना चाहिए।गृहिणी पुष्पा प्रजापत ने कोरोनारोधी टीकाकरण करवाकर बताया कि महिलाओं को भी जागरुकता के साथ टीकाकरण जरूर करवाना चाहिये । एएनएम कविता व एएनएम अरुणा ने टीके लगाये। इस मौके पर शिवकुमार जांगिड़, माया, गुलशन, हरीश, सुरेन्द्र सिंह, सुरेन्द्र भोडिवाल, मुकेश कुमार, पुरुषोत्तम, सुरेश ने सेवायें दी ।
अधिक वैक्सीन उपलब्ध करवाने की मांगग्राम पंचायत सरपंच विमला देवी, पूर्व जीएसएस अध्यक्ष परमेश्वर लाल दर्जी, सामाजिक कार्यकर्ता महावीर नेहरा, बीरबल नोखवाल आदि ने मांग की है कि सीएचसी को 18 से 45 वर्ष आयु वर्ग टीकाकरण सत्र के दौरान अधिक संख्या में वैक्सीन उपलब्ध करवाई जाए ताकि जल्दी से जल्दी युवाओं का कवरेज किया जा सके। उन्होंने बताया कि सीएचसी सेक्टर के अंतर्गत अनेक गांव आते हैं, उनकी आबादी को देखें तो यहां मिलने वाली डोज की संख्या अत्यंत कम है, इसलिए 18 वर्ष आयु वर्ग के लोगों के लिए अधिक वैक्सीन उपलब्ध करवाई जाए।

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