बालिकायें जयललिता की जीवनी से ले प्रेरणा – प्रजापति

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चूरू। राजकीय कस्तुरबा आवासीय विधालय के प्रांगण में ‘‘दिशा बोध,‘‘ कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एडवोकेट एवं किशोर न्याय बोर्ड, चूरू के सदस्य रामेश्वर प्रजापति रामसरा ने कहा कि सोने को चमकने के लिये आग मे तपना पड़ता है इसी तरह मिटटी को भी आग में तपाकर ही कुम्हार निहाई से निकालकर उसे बर्तन का आकार देता है। इसी तरह मस्तिक को जितना काम में लोगे उतना ही शिक्षा में निखार आयेगा। हमें अभावों को ताकत बनाकर, होशले को बुलंद रखकर अध्ययन में निरन्तरता रखनी है। उन्होने बालिकाओं से कहा कि जयललिता की जीवनी से संधर्षों में आगे बढने की प्रेरणा लेनी चाहिये। अम्मा जयललिता की दो वर्ष की आयु में ही पिता का निधन हो गया था, तथा मासी ने पाला था उन्होने जीवन में आगे बढने के अटुट संकल्प से 200 फिल्मों में काम किया और सफल अभिनेत्री रही और सफल मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया जब वो भगवान को प्यारी होई तो लाखों लोगों की आंखों में आसूं झलक गये थे।

उन्होने कहा कि हमें मां की कोख सहराना है, हमें आदर्श घर के आदर्श बच्चें के रूप मंे आगे बढना है, उन्होने बच्चों से कहा कि घर में हमसे छोटे बड़े आदर्श ग्रहण करें ऐसा जीवन बनाना है, जीवन एक दरिया है। जल जलप्रतापों में आंधी तुफान आते रहेंगें, हमें धाराओ के प्रतिकुल तैरतें रहना है। धाराओं के बहाव मंे तो मरी हुई मछलिया बह जाती है। जीवन सारा निर्णय पर है, जिन्होंने एक लक्ष्य निर्धारित कर आगे बढने का निर्णय समय पर लिया है वो हि कामयाबी की राह से उंचाईयों को छुआ है। उन्होने कहा कि आज हमें संकल्प लेना है, लीक से हठकर अध्ययन के लिए कुछ नया निर्माण करना है। हमें लक्ष्य निधारित करके उसके लिए हमे धीरगम्भीर होना है। उदेश्यः सही होता है तो दैव्य कृपा स्वतः ही प्राप्त हो जाती है। हमारे हर कदम हर क्षण सफलता की ओर अपने लक्ष्य की ओर होने चाहिए यदि आप में टेलेन्ट होगा तो आपको मार्ग दर्शन करने वाले आगे मिलते ही जायेगें। अपने भविष्य की प्रति सबसे पहले हमे स्वयं को जागृत होना है, अपनी खुद की रूची से हमें आगे बढना है। दाना खाक में मिलकें ‘‘गुले गुलजार होता है’’ कुछ पाने के लिए कुछ खोना भी पड़ता है। संस्कृत में कहावत है विद्यार्थी कुत्तम सुखम् विद्यार्थी को कहा सुख है। कड़ी मेहनत से तपस्वी के रूप में पढाई करनी है, उन्होने कहा कि बच्चे तो अनगढत पत्थर के सामान होते है, पत्थर कितनी चोटे खाकर मूर्ति का आकार लेता है, और जिस रूप में स्थापित हो जाता है, उसी रूप में लोग उसे नमन करते है।

प्रजापति ने बच्चों के द्वारा स्वतः पढने की प्ररेणा के टिप्स बताते हुए हिन्दी से हिन्दी, अग्रेजी से हिन्दी व हिन्दी से अग्रेजी डिक्सनरी से पढने व पुस्कालय के निरन्तर सम्पर्क में रहने तथा लगातार सिटिंग देेने की महता बतायी। उन्होने कहा कि बच्चों को प्रातः जल्दी उठने की प्ररेणा देकर उन्हे अनगिनत फायदे हमे समझाईस करने है, और लिखकर याद करने के भी फायदे बतायें तथा बच्चों को संस्कारित शिक्षा में बुजुर्गाे की सेवा के अनगिनत अवसर बताकर आर्शिवाद लेने की प्ररेणा दी, बच्चों को यह भी बताया कि आज तक जितने भी महान व्यक्ति हुए हैं उन्होंने अपने क्षेत्र में कठिन तपस्या की है। अभावों को ताकत बनाकर आगे बढे हैं। उन्होंने कहा कि सबसे पहले विश्वास उसके बाद प्रयास फिर मेहनत और उसके बाद अभ्यास सफलता का सूत्र है। असफलता भी हमें कुछ सीख देती है। असफलता के ठीक बाद सफलता हासिल की जा सकती है। जीवन में बड़े लक्ष्य की प्राप्ति के लिए छोटी-छोटी बातों पर समझौता कर लेना चाहिए। प्रजापति ने कहा कि बच्चों को यह भी बताये कि पहले अनुशासन, उसके बाद समय प्रबंधन में हर क्षण का सदुपयोग करना चाहिए, व्यायाम को भी पढाई के साथ-साथ कार्यक्रम का हिस्सा बनायें और संयम से आगे बढना चाहिए। हमारे में आत्मविश्वास नहीं होगा तो एक कदम भी चल पाना मुश्किल होगा। उन्होंने गूरू नानक, स्वामी गोपालदास, स्वामी केशवानन्द, डाॅ धासीराम वर्मा, महात्मा ज्योतिराव फुले के जीवन पर चर्चा करते हुए कहा कि हमें भी उनकी प्रेरणा से अपने लक्ष्य प्राप्ति के लिए निरन्तर अग्रसर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों को सिखायें कि भूतकाल को याद करोगे तो भूत का सा डर लगेगा। भविष्य की चिन्ता करोगे तो मस्तिष्क भारी रहेगा। वर्तमान अच्छा करोगे तो भविष्य निर्माण स्वतः ही अच्छा हो जायेगा। आज तक जितने भी बड़े लोग हुए है उन्होने अपना दायरा बढाया है, उन्होने शिक्षकों से कहा कि अपने जिले में शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता सुधार के लिए मोटीवेशनर के रूप में अलख जगाना है। उन्होंने बारह गुना पढाई के फार्मूले से पढने व आगे बढने के साथ ही गुणात्मक प्रतिशत अंक बढाने का भी फार्मूला बताया। प्रजापति ने बच्चों से कहा कि अंकूरित अनाज को भोजन का हिस्सा बनाना है। कवि गंग की पंक्तियां है ‘‘बुद्वि घटे अती भोजन खाया’’ विद्यार्थी को हल्का खाना लेना चाहिए। इस मौके पर शाला प्रधान सुशीला सहारण ने भी विचार व्यक्त किये इस अवसर पर कार्यक्रम में सुरज्ञान कंवर, कृष्णा, अनिता, विनोद, सुकेश, संतोष आदि ने सहभागिता दी।

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